जलवायु: हल्की, पाला-रहित जलवायु; अत्यधिक गर्मी फूलों को प्रभावित करती है
मिट्टी: उपजाऊ, अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट से दोमट मिट्टी
पीएच (pH): 5.5–7.0
खेत की तैयारी: मिट्टी को भुरभुरा बनाने के लिए 2–3 गहरी जुताई
बीज दर: लगभग 20–25 किलोग्राम प्रति एकड़
बुवाई का समय: फरवरी–मार्च (वसंत ऋतु) और सितंबर–अक्टूबर (शरद ऋतु)
दूरी (स्पेसिंग): पंक्ति से पंक्ति – 30–45 सेमी और पौधे से पौधे – 10–15 सेमी
उर्वरक एवं खाद: सड़ी गोबर की खाद (FYM) – 8–10 टन प्रति एकड़; 20–25 किलोग्राम नाइट्रोजन + 20–25 किलोग्राम फास्फोरस + 20 किलोग्राम पोटाश प्रति एकड़
सिंचाई: बुवाई के तुरंत बाद और आवश्यकतानुसार समय-समय पर सिंचाई करें; खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें लेकिन जलभराव न होने दें
खरपतवार नियंत्रण: शुरुआती बढ़वार के दौरान हाथ से निराई-गुड़ाई करें
प्रमुख कीट एवं रोकथाम:
-
माहू (एफिड): थायमेथोक्सम, इमिडाक्लोप्रिड
-
बीन फ्लाई: डाइमेथोएट
-
माइट्स (लाल मकड़ी): एबामेक्टिन, इमिडाक्लोप्रिड
-
थ्रिप्स: इमिडाक्लोप्रिड, एसिटामिप्रिड, फिप्रोनिल
-
फली छेदक (पॉड बोरर): क्लोरेंट्रानिलिप्रोल, इमामेक्टिन बेंजोएट, इंडोक्साकार्ब
-
सफेद मक्खी: एसिटामिप्रिड, फ्लोनिकामिड, इमिडाक्लोप्रिड
प्रमुख रोग एवं रोकथाम:
-
एंथ्रेक्नोज: एज़ोक्सीस्ट्रोबिन, डाइफेनोकोनाज़ोल, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड
-
झुलसा (ब्लाइट): मैंकोज़ेब, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड, साइमोक्सानिल
-
मोज़ेक वायरस: स्पाइरोमेसिफेन, इमिडाक्लोप्रिड, एसिटामिप्रिड (वाहक कीट नियंत्रण के लिए)
-
रस्ट (गेरुआ/रतुआ): एज़ोक्सीस्ट्रोबिन + डाइफेनोकोनाज़ोल
तुड़ाई:
-
बीजों के पूरी तरह विकसित होने से पहले ही छोटी, मुलायम और रसीली फलियों की तुड़ाई करें।
-
फलियों की गुणवत्ता बनाए रखने और लगातार नई पैदावार को बढ़ावा देने के लिए हर 2–3 दिन में नियमित तुड़ाई करें।
-
फलियों को अधिक पकने न दें, क्योंकि वे रेशेदार (कड़ी) हो जाती हैं।