1. जलवायु और मिट्टी
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जलवायु: समशीतोष्ण (Temperate) और उष्णकटिबंधीय (Tropical) दोनों जलवायु में सफल।
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मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली, भुरभुरी दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसमें पर्याप्त कार्बनिक पदार्थ हों। pH मान 5.5 से 7.0 के बीच होना चाहिए। मिट्टी 6-8 इंच तक गहरी और पत्थरों से मुक्त होनी चाहिए ताकि जड़ों का विकास सही हो सके। भारी या चिकनी मिट्टी से बचें, क्योंकि इससे जड़ें टेढ़ी-मेढ़ी हो सकती हैं।
2. खेत की तैयारी
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मिट्टी की संरचना सुधारने के लिए गोबर की अच्छी तरह सड़ी हुई खाद या कंपोस्ट मिलाएं।
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खेत की तैयारी के लिए: एक बार गहरी जुताई करें, उसके बाद 2-3 बार हैरो चलाकर मिट्टी को भुरभुरा (Fine tilth) बनाएं और अंत में क्यारियां (Ridges and furrow) तैयार करें।
3. बुवाई का समय और बीज दर
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सीजन: रबी और गर्मी का मौसम।
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बीज दर: 2 से 2.5 किलोग्राम प्रति एकड़।
4. पौधों के बीच की दूरी
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कतार से कतार: 50-60 सेमी
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पौधे से पौधे: 8-10 सेमी
5. उर्वरक प्रबंधन (प्रति एकड़)
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कुल आवश्यकता: 40:60:40 किग्रा (N:P:K) प्रति एकड़।
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बेसल डोज़ (बुवाई के समय): 50% नाइट्रोजन (N), 75% फास्फोरस (P) और 100% पोटाश (K) को अंतिम जुताई के समय डालें।
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टॉप ड्रेसिंग: बुवाई के 20-25 दिन बाद शेष 50% नाइट्रोजन (N) और 25% फास्फोरस (P) डालें।
6. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
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सिंचाई: अंकुरण और कटाई के समय नमी का स्तर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। गर्मियों में और हल्की मिट्टी में बार-बार सिंचाई की आवश्यकता होती है, जबकि सर्दियों और बरसात में हल्की सिंचाई पर्याप्त है।
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खरपतवार: बुवाई के 20-25 दिन बाद निराई-गुड़ाई करें। यह मिट्टी को ढीला करने और गुणवत्तापूर्ण जड़ों के विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
7. कटाई
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कटाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी (वपसा स्थिति) होनी चाहिए ताकि जड़ें पूरी तरह से निकल सकें।
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कटाई के बाद जड़ों को धोना आवश्यक है ताकि उनकी चमक और रंग स्पष्ट रूप से दिखाई दे।
8. संभावित उपज
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मानक कृषि पद्धतियों के साथ औसत उपज लगभग 20-25 मीट्रिक टन प्रति एकड़ होती है। (नोट: उपज के आंकड़े परीक्षणों पर आधारित हैं और कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार बदल सकते हैं।)