1. मिट्टी और जलवायु
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मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी, जिसका pH मान 6.0 से 7.5 हो, इसके लिए सर्वोत्तम है।
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तापमान: मटर को ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। अनुकूल विकास के लिए 10°C से 30°C का तापमान आदर्श माना जाता है।
2. बुवाई और बीज दर
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मौसम: रबी (शीतकालीन) मौसम, विशेषकर अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई सबसे उपयुक्त होती है।
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बीज दर: 20 से 25 किलोग्राम प्रति एकड़।
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दूरी: कतार से कतार की दूरी 30–45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10–15 सेमी रखें। बीजों को 2–3 सेमी की गहराई पर बोएं।
3. उर्वरक प्रबंधन
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जैविक खाद: अंतिम खेत की तैयारी से कम से कम 15 दिन पहले 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद (FYM) मिलाएं।
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रासायनिक उर्वरक: बुवाई के समय 25 किलोग्राम नाइट्रोजन/हेक्टेयर, 70 किलोग्राम P₂O₅/हेक्टेयर और 50 किलोग्राम K₂O/हेक्टेयर की संतुलित खुराक दें। उर्वरकों को बीजों से 7–8 सेमी दूर बैंड के रूप में डालें ताकि बीजों को नुकसान न हो।
4. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण
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सिंचाई: फसल चक्र के दौरान आमतौर पर 4–5 सिंचाई की आवश्यकता होती है। बुवाई से पहले, फूल आने के समय और फली बनते समय सिंचाई करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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खरपतवार नियंत्रण: खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए 1-2 बार निराई-गुड़ाई करें या पेंडिमेथालिन जैसे प्री-इमर्जेंस खरपतवारनाशक का उपयोग करें।
5. कीट और रोग प्रबंधन
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बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कैप्टन, थिरम या बाविस्टिन से उपचारित करें। इसके बाद नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) बढ़ाने के लिए राइजोबियम कल्चर का उपयोग करें।
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रोग: 'GS 10' किस्म में पाउडरी मिल्ड्यू (पाउडर जैसी फफूंद) के प्रति सहनशीलता होती है। उकठा (wilt) और रस्ट (rust) रोगों से बचने के लिए जल्दी बुवाई से बचें। लक्षण दिखने पर Dithane M-45 (0.2%) का छिड़काव करें।
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कीट: माहू (aphids), लीफ माइनर या स्टेम फ्लाई के नियंत्रण के लिए डायमेथोएट (0.03%) या मैलाथियान (0.05%) का प्रयोग करें।
6. कटाई
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बुवाई के 55 से 65 दिनों के बाद फलियां तोड़ने के लिए तैयार हो जाती हैं। कटाई तब करें जब फलियां पूरी तरह भर जाएं और उनमें 8 से 10 नरम, मीठे और एक समान दाने हों।