मटर उत्पादन की समग्र सिफारिशें

मटर की खेती में अधिकतम उपज प्राप्त करने के लिए, बीजों की बुवाई अक्टूबर से मध्य नवंबर के बीच करें। पौधों के बीच की दूरी 30-45 सेमी × 10-15 सेमी रखें और प्रति एकड़ 20-25 किलोग्राम बीज का उपयोग करें।

मटर उत्पादन की समग्र सिफारिशें

1. मिट्टी और जलवायु

  • मिट्टी: अच्छी जल निकासी वाली दोमट से लेकर चिकनी दोमट मिट्टी, जिसका pH मान 6.0 से 7.5 हो, इसके लिए सर्वोत्तम है।

  • तापमान: मटर को ठंडी जलवायु की आवश्यकता होती है। अनुकूल विकास के लिए 10°C से 30°C का तापमान आदर्श माना जाता है।

2. बुवाई और बीज दर

  • मौसम: रबी (शीतकालीन) मौसम, विशेषकर अक्टूबर से नवंबर के बीच बुवाई सबसे उपयुक्त होती है।

  • बीज दर: 20 से 25 किलोग्राम प्रति एकड़।

  • दूरी: कतार से कतार की दूरी 30–45 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 10–15 सेमी रखें। बीजों को 2–3 सेमी की गहराई पर बोएं।

3. उर्वरक प्रबंधन

  • जैविक खाद: अंतिम खेत की तैयारी से कम से कम 15 दिन पहले 10 टन प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर की खाद (FYM) मिलाएं।

  • रासायनिक उर्वरक: बुवाई के समय 25 किलोग्राम नाइट्रोजन/हेक्टेयर, 70 किलोग्राम P₂O₅/हेक्टेयर और 50 किलोग्राम K₂O/हेक्टेयर की संतुलित खुराक दें। उर्वरकों को बीजों से 7–8 सेमी दूर बैंड के रूप में डालें ताकि बीजों को नुकसान न हो।

4. सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण

  • सिंचाई: फसल चक्र के दौरान आमतौर पर 4–5 सिंचाई की आवश्यकता होती है। बुवाई से पहले, फूल आने के समय और फली बनते समय सिंचाई करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • खरपतवार नियंत्रण: खेत को खरपतवार मुक्त रखने के लिए 1-2 बार निराई-गुड़ाई करें या पेंडिमेथालिन जैसे प्री-इमर्जेंस खरपतवारनाशक का उपयोग करें।

5. कीट और रोग प्रबंधन

  • बीज उपचार: बुवाई से पहले बीजों को कैप्टन, थिरम या बाविस्टिन से उपचारित करें। इसके बाद नाइट्रोजन स्थिरीकरण (nitrogen fixation) बढ़ाने के लिए राइजोबियम कल्चर का उपयोग करें।

  • रोग: 'GS 10' किस्म में पाउडरी मिल्ड्यू (पाउडर जैसी फफूंद) के प्रति सहनशीलता होती है। उकठा (wilt) और रस्ट (rust) रोगों से बचने के लिए जल्दी बुवाई से बचें। लक्षण दिखने पर Dithane M-45 (0.2%) का छिड़काव करें।

  • कीट: माहू (aphids), लीफ माइनर या स्टेम फ्लाई के नियंत्रण के लिए डायमेथोएट (0.03%) या मैलाथियान (0.05%) का प्रयोग करें।

6. कटाई

  • बुवाई के 55 से 65 दिनों के बाद फलियां तोड़ने के लिए तैयार हो जाती हैं। कटाई तब करें जब फलियां पूरी तरह भर जाएं और उनमें 8 से 10 नरम, मीठे और एक समान दाने हों।

More Blogs